প্রতিরক্ষা ও দুর্যোগ মোকাবিলায় রোবোটিক্সের অগ্রগতিতে টেরিটোরিয়াল আর্মির সঙ্গে সমঝোতা স্মারক স্বাক্ষর জেনরোবোটিক্সের

Kolkata / August 29, 2026

 

কলকাতা, ২৯ আগস্ট: রোবোটিক্স গবেষণা, প্রযুক্তি মূল্যায়ন, প্রশিক্ষণ ও সক্ষমতা উন্নয়নে পারস্পরিক সহযোগিতার কাঠামো গড়ে তুলতে ভারতের প্রযুক্তিনির্ভর কৌশলগত রিজার্ভ বাহিনী টেরিটোরিয়াল আর্মির (TA) সঙ্গে একটি সমঝোতা স্মারক (MoU) স্বাক্ষর করেছে জেনরোবোটিক্স।

কলকাতায় আয়োজিত KYTA & TA 2.0 Symposium-এ এই সমঝোতা স্মারক স্বাক্ষরিত হয়। এর আওতায় ঝুঁকিপূর্ণ পরিবেশে ব্যবহারের উপযোগী রোবোটিক্স, দুর্যোগ মোকাবিলা ও HADR (Humanitarian Assistance and Disaster Relief), সংকীর্ণ স্থানে কার্যক্রম, গুরুত্বপূর্ণ পরিকাঠামো পরিদর্শন, ইঞ্জিনিয়ারিং সহায়তা, AI-নির্ভর পরিদর্শন ও রিমোট সেন্সিং এবং দেশীয় গবেষণা ও উন্নয়ন (R&D)-সহ বিভিন্ন ক্ষেত্রে সহযোগিতা করা হবে। পাশাপাশি প্রযুক্তি প্রদর্শন, ব্যবহারকারী পর্যায়ে পরীক্ষা এবং বিশেষায়িত প্রশিক্ষণও এর অন্তর্ভুক্ত থাকবে।

টেরিটোরিয়াল আর্মির পক্ষে সমঝোতা স্মারকে স্বাক্ষর করেন ADG TA মেজর জেনারেল এস এস পাটিল, AVSM, VSM এবং জেনরোবোটিক্সের পক্ষে স্বাক্ষর করেন সংস্থার CEO ও Co-founder বিমল গোবিন্দ এম কে।

২৭ আগস্ট, TA 2.0 Symposium-এর পাশাপাশি এই সমঝোতা স্মারক স্বাক্ষরিত হয়। অনুষ্ঠানে জেনরোবোটিক্সের CEO বিমল গোবিন্দ এম কে ভারতের অসামরিক ক্ষেত্রের দক্ষ মানবসম্পদকে সামরিক সক্ষমতা বৃদ্ধির কাজে কীভাবে কাজে লাগানো যেতে পারে, সে বিষয়ক প্যানেল আলোচনাতেও অংশ নেন।

ঝুঁকিপূর্ণ ও সংকীর্ণ স্থানে কাজের জন্য রোবোটিক ব্যবস্থা তৈরির ক্ষেত্রে জেনরোবোটিক্স পরিচিত। সংস্থার তৈরি Bandicoot ম্যানহোল ও নর্দমা পরিষ্কারকারী রোবট ইতিমধ্যেই সুপরিচিত। পাশাপাশি সংস্থাটি দুর্যোগ মোকাবিলা এবং প্রতিরক্ষা-সহায়ক রোবোটিক্সের ক্ষেত্রেও কার্যক্রম সম্প্রসারণ করছে। টেরিটোরিয়াল আর্মির সঙ্গে এই অংশীদারিত্ব জাতীয় নিরাপত্তা ও দুর্যোগ মোকাবিলার কাজে সংস্থার দেশীয় রোবোটিক্স প্রযুক্তি প্রয়োগের ক্ষেত্রে একটি গুরুত্বপূর্ণ পদক্ষেপ।

সিম্পোজিয়ামে জেনরোবোটিক্স তাদের প্যাভিলিয়নে প্রতিরক্ষা ক্ষেত্রে প্রয়োগযোগ্য একাধিক প্রযুক্তিও প্রদর্শন করে। এর প্রধান আকর্ষণ ছিল G-Bot, একটি দ্বিপদী রোবটের প্রোটোটাইপ এবং জেনরোবোটিক্সের ভবিষ্যৎ প্রযুক্তির অন্যতম প্রধান প্রকল্প। এর মাধ্যমে সংস্থাটি প্রথমবারের মতো সম্পূর্ণ হিউম্যানয়েড রোবট জনসমক্ষে প্রদর্শন করে।

প্রদর্শিত প্রযুক্তির মধ্যে আরও ছিল Genbot, যা পরিকাঠামোর এমন গুরুত্বপূর্ণ মিশনের জন্য তৈরি যেখানে মানুষের মতো প্রবেশযোগ্যতা প্রয়োজন; সংস্থার রোবোটিক রোভার; এবং শরীরের উপরের অংশের পুনর্বাসনের জন্য তৈরি G-KAI

বর্তমানে জেনরোবোটিক্স পাঁচটি ক্ষেত্রে কাজ করছে— স্যানিটেশন, মেডিক্যাল, অয়েল অ্যান্ড গ্যাস, ডিফেন্স এবং স্পেস। শক্তিশালী গবেষণা ও উন্নয়ন সক্ষমতার ভিত্তিতে সংস্থাটি ভারতের অন্যতম উল্লেখযোগ্য ডিপ-টেক স্টার্টআপ হিসেবে উঠে এসেছে।

সাম্প্রতিক মাসগুলিতে জেনরোবোটিক্স ISRO এবং ভারতীয় সেনাবাহিনীর অবসরপ্রাপ্ত ইঞ্জিনিয়ারদেরও সংস্থার সঙ্গে যুক্ত করেছে। প্রতিরক্ষা প্রযুক্তির ক্ষেত্রে সংস্থার সম্প্রসারণ এবং এই ক্ষেত্রকে তারা যে গুরুত্বের সঙ্গে এগিয়ে নিয়ে যাচ্ছে, এই পদক্ষেপ তারই প্রতিফলন।

এর কয়েক দিন আগেই জেনরোবোটিক্স থুম্বায় প্রতিরক্ষা ও মহাকাশ প্রযুক্তির গবেষণা, উন্নয়ন এবং উৎপাদনের জন্য নিবেদিত একটি নতুন উৎপাদন কেন্দ্রের উদ্বোধন করেছে, যা প্রতিরক্ষা প্রযুক্তির ক্ষেত্রে সংস্থার এই অগ্রযাত্রাকে আরও জোরদার করেছে।

 

प्रेस विज्ञप्ति

रक्षा और आपदा प्रतिक्रिया के लिए रोबोटिक्स को आगे बढ़ाने हेतु टेरिटोरियल आर्मी के साथ जेनरोबोटिक्स ने किया एमओयू

 

कोलकाता, 29 अगस्त: जेनरोबोटिक्स ने भारत की तकनीक-सक्षम रणनीतिक रिजर्व फोर्स, टेरिटोरियल आर्मी (TA) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य रोबोटिक्स अनुसंधान, प्रौद्योगिकी मूल्यांकन, प्रशिक्षण और क्षमता विकास में सहयोग के लिए एक रूपरेखा तैयार करना है।

इस समझौता ज्ञापन पर कोलकाता में आयोजित KYTA & TA 2.0 Symposium के दौरान हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत जोखिमपूर्ण वातावरण में उपयोग होने वाली रोबोटिक्स, आपदा प्रतिक्रिया और HADR (Humanitarian Assistance and Disaster Relief), सीमित स्थानों में संचालन, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे का निरीक्षण, इंजीनियरिंग सहायता, AI-सक्षम निरीक्षण एवं रिमोट सेंसिंग और स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास (R&D) सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग किया जाएगा। इसके अलावा, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन, उपयोगकर्ता परीक्षण और विशेषज्ञ प्रशिक्षण भी इस सहयोग का हिस्सा होंगे।

टेरिटोरियल आर्मी की ओर से समझौता ज्ञापन पर मेजर जनरल एस एस पाटिल, AVSM, VSM, ADG TA ने हस्ताक्षर किए, जबकि जेनरोबोटिक्स की ओर से कंपनी के CEO एवं Co-founder विमल गोविंद एम.के. ने हस्ताक्षर किए।

यह समझौता 27 अगस्त को TA 2.0 Symposium के अवसर पर किया गया। इस दौरान जेनरोबोटिक्स के CEO विमल गोविंद एम.के. ने सैन्य क्षमता निर्माण के लिए भारत की नागरिक प्रतिभा का उपयोग करने के विषय पर आयोजित पैनल चर्चाओं में भी भाग लिया।

जेनरोबोटिक्स जोखिमपूर्ण और सीमित स्थानों में संचालन के लिए रोबोटिक प्रणालियां विकसित करने के लिए जानी जाती है। इनमें कंपनी के Bandicoot मैनहोल और सीवर-सफाई रोबोट शामिल हैं। कंपनी आपदा प्रतिक्रिया और रक्षा-संबंधित रोबोटिक्स अनुप्रयोगों के क्षेत्र में भी अपनी गतिविधियों का विस्तार कर रही है। टेरिटोरियल आर्मी के साथ यह साझेदारी राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा प्रतिक्रिया से जुड़े उपयोगों में कंपनी की स्वदेशी रोबोटिक्स क्षमताओं के इस्तेमाल की दिशा में एक कदम है।

सिम्पोजियम में जेनरोबोटिक्स ने अपने पवेलियन में रक्षा से संबंधित अनुप्रयोगों वाली कई तकनीकों का प्रदर्शन भी किया। इनमें प्रमुख आकर्षण G-Bot था, जो एक द्विपाद रोबोट प्रोटोटाइप और जेनरोबोटिक्स की प्रमुख भावी तकनीक है। इसके साथ कंपनी ने पहली बार एक पूर्ण ह्यूमनॉइड रोबोट को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया।

प्रदर्शित तकनीकों में Genbot भी शामिल था, जिसे ऐसे महत्वपूर्ण मिशनों के लिए विकसित किया गया है जहां बुनियादी ढांचे के भीतर मानव स्तर की पहुंच की आवश्यकता होती है। इसके अलावा कंपनी का रोबोटिक रोवर और शरीर के ऊपरी हिस्से के पुनर्वास के लिए विकसित उपकरण G-KAI भी प्रदर्शित किए गए।

जेनरोबोटिक्स अब पांच क्षेत्रों में काम कर रही है— सैनिटेशन, मेडिकल, ऑयल एंड गैस, डिफेंस और स्पेस। मजबूत R&D क्षमताओं के बल पर कंपनी भारत के प्रमुख डीप-टेक स्टार्टअप्स में से एक के रूप में उभरी है।

हाल के महीनों में कंपनी ने ISRO और भारतीय सेना के सेवानिवृत्त इंजीनियरों को भी अपने साथ जोड़ा है। यह कदम रक्षा क्षेत्र और रक्षा प्रौद्योगिकियों में विस्तार को लेकर जेनरोबोटिक्स के गंभीर दृष्टिकोण को दर्शाता है।

 

इस दिशा में कंपनी के प्रयासों को कुछ दिन पहले और मजबूती मिली, जब जेनरोबोटिक्स ने थुम्बा में रक्षा और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के लिए R&D और उत्पादन को समर्पित एक नई उत्पादन सुविधा का उद्घाटन किया।

 

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