विक्टोरिया मेमोरियल हॉल में ‘लेंसस्केप केरल’ प्रदर्शनी
Kolkata / March 27, 2026
कोलकाता, 27 मार्च: अखिल भारतीय फोटो प्रदर्शनी ‘लेंसस्केप केरल’ का आरंभ आज विक्टोरिया मेमोरियल हॉल के दरबार हॉल में हुआ। इस प्रदर्शनी में भारत के 10 प्रमुख ट्रैवल और मीडिया फोटोग्राफरों द्वारा खींचे गए 100 फ्रेमों के माध्यम से ‘ईश्वर के अपने देश’ (God’s Own Country) केरल की हरी-भरी प्रकृति, समावेशी संस्कृति और एक किसी भी मौसम में आ सकने वाले पर्यटन स्थल के रूप में वहां के जीवन के अनुभवों को प्रदर्शित किया गया है।
यह प्रदर्शनी, विक्टोरिया मेमोरियल हॉल (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा केरल पर्यटन, केरल सरकार के सहयोग से आयोजित की गई है। इसका उद्घाटन वीएमएच (VMH) के सचिव और क्यूरेटर डॉ. शायन भट्टाचार्य ने किया।
इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. शायन भट्टाचार्य ने कहा, “विक्टोरिया मेमोरियल हॉल, जो भारत का सबसे अधिक देखा जाने वाला म्यूजियम है, में हम हमेशा ऐसी प्रदर्शनियों के लिए एक मंच प्रदान करने के इच्छुक रहते हैं जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत का उत्सव मनाती हैं और उसे बढ़ावा देती हैं। केरल देश की प्राकृतिक, सांस्कृतिक, कलात्मक और अमूर्त विरासत का एक खजाना है। ऐसे समय में जब देश ‘रिवर्स टूरिज्म’ (अज्ञात, छोटे या अनछुए स्थानों की यात्रा करना पसंद किया जाना) पर नए सिरे से जोर दे रहा है और घरेलू यात्रा को प्रोत्साहित कर रहा है, यह प्रदर्शनी उस दृष्टिकोण के साथ पूरी तरह से मेल खाती है। आगंतुक भारत के एक कोने में खड़े होकर, दूसरे कोने की सुंदरता और विविधता का अनुभव करने का सचमुच आनंद लेंगे। ऐसी पहल ‘विकसित भारत’ के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसमें सांस्कृतिक आत्मविश्वास अर्थात अपनी विरासत, भाषा, मूल्यों
पर गर्व करना और उन्हें आत्मसात करना, सतत पर्यटन और राष्ट्रीय एकता समावेशी विकास के प्रमुख चालक हैं। यह प्रदर्शनी ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’, ‘देखो अपना देश’ और ‘स्वदेश दर्शन’ जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों के साथ भी तालमेल बिठाती है, जो भारतीयों को देश के विविध सांस्कृतिक परिदृश्यों को खोजने, उनकी सराहना करने और उनसे जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”
यह प्रदर्शनी 29 मार्च तक सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक चलेगी।
यह प्रदर्शनी एक अभिनव पहल है जो केरल की अनंत विविधता और आकर्षण को विभिन्न कोणों से प्रदर्शित करती है, जिसमें राज्य के विभिन्न हिस्सों में खींची गई तस्वीरों का एक अनूठा संग्रह शामिल है।
इस प्रदर्शनी में भाग लेने वाले फोटोग्राफर, जो भारत के विभिन्न हिस्सों से आए थे, उन्होंने पिछले साल दिसंबर में विरासत, वास्तुकला, बैकवाटर, वन्यजीव, त्योहारों, आध्यात्मिकता और खेती व तटीय समुदायों के जीवन जैसे विभिन्न विषयों को अपने कैमरे में कैद किया।
देश की सबसे पहली पहल के तहत, 10 शहरों में होने वाले इस शो ने देश भर के बड़े शहरों में दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया है। इसकी शुरुआत जनवरी की शुरुआत में नई दिल्ली से हुई थी, जिसके बाद यह 'आनंद के शहर' (City of Joy) पहुंची, जहां का सांस्कृतिक माहौल मलयालम भाषी लोगों के दिलों को छू जाता है। यह प्रदर्शनी उन लोगों के लिए एक निमंत्रण और विज़ुअल गाइड का भी काम करती है, जिन्होंने केरल घूमने को अपनी 'बकेट लिस्ट' (इच्छा सूची) में शामिल किया हुआ है; साथ ही उन लोगों के लिए भी, जो पहले ही इस राज्य को देख चुके हैं और अब यहां के अनुभवों की नई परतों को खोजना चाहते हैं।
इस प्रदर्शनी को जानी-मानी कला क्यूरेटर और समीक्षक उमा नायर ने क्यूरेट किया है, जबकि जाने-माने वन्यजीव और संरक्षण फ़ोटोग्राफ़र बालन माधवन इस प्रोजेक्ट के 'डायरेक्टर ऑफ़ फ़ोटोग्राफ़ी' हैं। इस प्रोजेक्ट में हिस्सा लेने वाले फ़ोटोग्राफ़र हैं: एच. सतीश, शिवांग मेहता, सैबल दास, उमेश गोगना, सौरभ चटर्जी, नताशा करतार हेमराजानी, ऐश्वर्या श्रीधर, अमित पसरीचा, मनोज अरोड़ा और कौंतेय सिन्हा। इन सभी ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा कीऔर विविध विषयों व रुचियों पर अपना ध्यान केंद्रित किया।
उमा नायर के अनुसार, 'लेंसस्केप केरल' दर्शकों को केरल के कई आयामों की एक ऐसी विज़ुअल यात्रा दिखाने का वादा करता है, जो उनकी जिज्ञासा को जगाती है, उनकी सराहना की भावना को और बढ़ाती है, और उनके मन में एक स्थायी प्रशंसा का भाव पैदा करती है। बालन माधवन ने बताया कि जिन-जिन जगहों पर यह शो गया, उन सभी जगहों पर इसे दर्शकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। शो के उद्घाटन के बाद, उमा नायर ने प्रदर्शनी का एक 'वॉकथ्रू' (दर्शकों को प्रदर्शनी घुमाकर उसके बारे में जानकारी देना) भी करवाया।
नई दिल्ली में हुए भव्य उद्घाटन के बाद, यह शो वडोदरा, अहमदाबाद, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और सूरत का दौरा करते हुए इस शहर में पहुंचा है।